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Raipur

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी का इतिहास, विकास और पर्यटन रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी का इतिहास, विकास और पर्यटन रायपुर , भारत के छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी है, जो अपने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक महत्व के लिए जानी जाती है। यह शहर अब एक स्मार्ट सिटी के रूप में तेजी से उभर रहा है। इतिहास और पृष्ठभूमि रायपुर का इतिहास 9वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। पहले यह दक्ष-कोशल राज्य का हिस्सा था, फिर कलचुरी वंश, मराठों और अंत में ब्रिटिश शासन के अधीन रहा। वर्ष 2000 में जब छत्तीसगढ़ बना, तब इसे राज्य की राजधानी घोषित किया गया। भौगोलिक स्थिति यह शहर महानदी के किनारे बसा हुआ है और मैदानी क्षेत्र से घिरा हुआ है। यहाँ की जलवायु उष्णकटिबंधीय है, जिससे गर्मी अधिक होती है और सर्दियाँ ठंडी। राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा, सचिवालय, मुख्यमंत्री निवास तथा उच्च न्यायालय जैसे प्रमुख संस्थान हैं। यह राज्य की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र है। शिक्षा औ...
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🏞️ कोंडागांव: बस्तर की कला और संस्कृति का जीवंत प्रतीक

  कोंडागांव: बस्तर का कला-संस्कृति से भरा अद्भुत जिला | Kondagaon in Hindi 🏞️ कोंडागांव: बस्तर की कला और संस्कृति का जीवंत प्रतीक 📍 कोंडागांव कहां स्थित है? कोंडागांव भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग में स्थित एक प्रमुख जिला है। यह जिला अपनी जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक हस्तशिल्प, बेलमेटल कला , और शांतिपूर्ण प्राकृतिक दृश्यों के लिए जाना जाता है। यहाँ की जनसंख्या में गोंड, मुरिया, और हल्बा जैसे जनजातीय समुदायों की प्रमुखता है, जो आज भी अपनी पारंपरिक जीवनशैली को जीवित रखे हुए हैं। 🧱 कोंडागांव का इतिहास कोंडागांव का इतिहास बस्तर रियासत से जुड़ा हुआ है। कभी यह क्षेत्र बस्तर राज्य का हिस्सा था। 24 जनवरी 2012 को इसे स्वतंत्र जिला घोषित किया गया। यह क्षेत्र वर्षों से कला, संस्कृति, और शिल्प का केंद्र रहा है। 🎨 बेलमेटल शिल्प: कोंडागांव की पहचान कोंडागांव को "बेलमेटल कला की राजधानी" कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यह प्राचीन "ढोको कला" (Dhokra Art) तकनीक पर आधारित है जिसमें पीतल और कांसे से शिल्प बनाए जाते हैं। यह शिल्पकारी मोम से ढलाई (Lost Wax ...

कोंडागांव की 5 बड़ी खबरें | 18 जून 2025 की ताज़ा रिपोर्ट

  📰 कोंडागांव की ताज़ा और यूनिक खबरें | Kondagaon News Update 2025 दिनांक: 18 जून 2025 स्थान: कोंडागांव, बस्तर (छत्तीसगढ़) 🔹 1. Keskal बाईपास को मिली मंज़ूरी — ₹307.96 करोड़ की परियोजना कोंडागांव में यातायात सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने 11.38 किमी लंबे Keskal Bypass को मंज़ूरी दे दी है। यह चार लेन बाईपास ₹307.96 करोड़ की लागत से तैयार होगा और इससे बस्तर अंचल की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। 🛣️ स्रोत: Times of India 🔹 2. रिश्वत लेते पकड़ा गया नायब तहसीलदार – एसीबी की कार्रवाई ACB ने कोंडागांव में एक नायब तहसीलदार को ₹10,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा । आरोप है कि उसने और अधिक राशि की मांग की थी। यह कार्रवाई प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम है। ⚖️ स्रोत: नवभारत टाइम्स 🔹 3. मंडी में अवैध मक्का पकड़ी गई — 1 लाख का जुर्माना कोंडागांव मंडी विभाग ने अवैध रूप से लाई गई 1,000 बोरी मक्का जब्त की, जो ओडिशा से लाई गई थी। संबंधित व्यापारियों पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया। 🌾 यह कार्रवाई अनाज व्यापार में...

✈️ अहमदाबाद प्लेन क्रैश 2025: हादसा या लापरवाही?

  ✈️ अहमदाबाद प्लेन क्रैश 2025: हादसा या लापरवाही? 🗓️ दिनांक: 16 जून 2025 📍 स्थान: सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, अहमदाबाद 🛩️ उड़ान: चार्टर्ड प्लेन (मुंबई से अहमदाबाद) 👥 यात्री: 6 (2 पायलट + 4 यात्री) 🕒 समय: सुबह 7:45 बजे 🔥 क्या हुआ था? 16 जून की सुबह एक चार्टर्ड प्लेन लैंडिंग के दौरान रनवे से फिसल गया और उसमें आग लग गई। प्लेन अहमदाबाद एयरपोर्ट पर क्रैश हो गया। प्रमुख बातें: इंजन में तकनीकी खराबी की आशंका लैंडिंग के समय तेज़ हवा और असंतुलन विमान में आग लग गई, लेकिन सभी यात्री सुरक्षित बचा लिए गए 🛑 जांच रिपोर्ट क्या कहती है? DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक इंजन फेल्योर या तकनीकी खराबी की आशंका है। ब्लैक बॉक्स जब्त कर लिया गया है 👥 यात्रियों की स्थिति सभी 6 लोग सुरक्षित 2 लोगों को मामूली चोटें अस्पताल में इलाज जारी ❓ अहम सवाल क्या विमान की समय पर सर्विसिंग हुई थी? क्या पायलट को मौसम की सही जानकारी थी? क्या रनवे पर कोई गड़बड़ी थी? 📌 निष्कर्ष यह हादसा भारत की विमानन सुरक्षा को लेकर एक चेतावनी है। यात्रिय...

बस्तर में नक्सलवाद: एक सच्चाई जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

  बस्तर में नक्सलवाद: एक सच्चाई जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता नक्सलवाद क्या है? नक्सलवाद एक उग्रवादी आंदोलन है जिसकी शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से हुई थी। यह आंदोलन सामाजिक और आर्थिक असमानता के खिलाफ शुरू हुआ था, जिसमें गरीबों, आदिवासियों और भूमिहीन किसानों को उनके अधिकार दिलाने की बात कही गई थी। हालांकि समय के साथ यह आंदोलन हिंसात्मक और विध्वंसकारी बन गया, और इसका दायरा भारत के कई राज्यों में फैल गया — जिनमें छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और आंध्र प्रदेश प्रमुख हैं। बस्तर में नक्सलवाद की शुरुआत बस्तर, छत्तीसगढ़ का दक्षिणी हिस्सा है, जो प्राकृतिक संसाधनों और घने जंगलों से समृद्ध है। 1980 के दशक में जब आंध्र प्रदेश के माओवादी गुट बस्तर के जंगलों में प्रवेश करने लगे, तब इस क्षेत्र में नक्सल गतिविधियाँ शुरू हुईं। यहाँ की आदिवासी आबादी, जो वर्षों से उपेक्षित, गरीब और शिक्षा से वंचित थी, उनके लिए नक्सली नेताओं की बातें आकर्षक लगीं — जैसे जमीन का हक, शोषण से मुक्ति, और समानता। नक्सलवाद फैलने के मुख्य कारण गरीबी और बेरोजगारी शिक्षा की कमी और सरकारी उपेक्षा वन अधिकारों का...

कोंडागांव भ्रष्टाचार पर कार्रवाई

  कोंडागांव की जानकारी कोंडागांव की ताजा खबरें: भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, शिक्षा में सुधार और विकास की नई पहल छत्तीसगढ़ का कोंडागांव जिला इन दिनों कई वजहों से सुर्खियों में है। यहां प्रशासनिक स्तर पर जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो रही है, वहीं शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आइए जानते हैं इस सप्ताह कोंडागांव से जुड़ी कुछ अहम खबरें। भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई कोंडागांव में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक नायब तहसीलदार को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। यह कार्रवाई न केवल प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इससे जनता में भी एक सकारात्मक संदेश गया है कि अब भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र में राहत की खबर गांवों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से खंडाम और बाखरा के प्राथमिक विद्यालयों में दो-दो शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इससे करीब 131 बच्चों को अब नियमित शिक्षा मिल सकेगी। लंबे समय से शिक्षकविहीन स्कूलों की समस्या पर यह एक स्वागत योग्य कदम है। तेजी...

बस्तर का अनूठा इतिहास: संस्कृति, संघर्ष और विरासत

बस्तर का इतिहास  छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र अपनी अद्वितीय संस्कृति, ऐतिहासिक संघर्षों और आदिवासी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। बस्तर का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक भी है। आइए जानते हैं बस्तर की ऐतिहासिक यात्रा के बारे में। बस्तर रियासत की स्थापना बस्तर रियासत की स्थापना 14वीं शताब्दी में राजा अनम देव द्वारा की गई थी। वे ओडिशा के काकतीय वंश से संबंधित थे और बस्तर आकर एक स्वतंत्र रियासत की नींव रखी। शुरू में राजधानी बर्सूर रही, जिसे बाद में जगदलपुर में स्थानांतरित किया गया। जनजातीय संस्कृति और परंपराएँ बस्तर की आत्मा उसकी आदिवासी जनजातियाँ हैं — जैसे गोंड, मुरिया, भतरा आदि। इनकी भाषा, पहनावा, लोकनृत्य और पर्व विशेष होते हैं। बस्तर दशहरा यहां का सबसे बड़ा पर्व है, जो पूरे 75 दिन तक चलता है और यह भारत का सबसे लंबा त्योहार माना जाता है। बस्तर दशहरा: राजपरिवार की परंपरा बस्तर दशहरा की शुरुआत राजा पुरुषोत्तम देव ने की थी और आज भी यह त्योहार राजपरिवार और जनता की सहभागिता से मनाया जाता है। यह सांस्कृतिक उत्सव जनजातीय आस्था और परंपरा का प्रतीक है। ब्रिटिश शासन और ...